राजधानी जयपुर के बायोलॉजिकल पार्क प्रशासन के आंखों के तारे बने टाइगर कब्स को बुधवार को खुले और बड़े बाड़े में निकाला गया. अब तक बाघिन रंभा को दोनों शावकों के साथ छोटे एंक्लोजर में रखा हुआ था. अब शावक बड़े इलाके में घूम सकेंगे और उन्हें यहां शिकार की प्रैक्टिस कराई जाएगी. 14 साल बाद जयपुर में इन शावकों का जन्म हुआ है. चार महीने पहले राजधानी जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 3 बाघ शावकों का जन्म हुआ था, एक शावक रहा नहीं. बचे हुए दो शावक अब चार महीने के हो गए हैं और बढ़ती उम्र के साथ वे अपने तेवर भी बदलने लगे हैं. आज इन शावकों और मां रंभा के साथ जब बड़े एनक्लोजर में छोड़ा गया तो पहले बाहर आने में शावक और बाघिन दोनों ही झिझके लेकिन बाद में उन्होंने अपने हंटिंग ग्राउंड का जायजा भी लिया. इस इलाके में शावकों को मुर्गों का शिकार करना सिखाया जाएगा. अब तक शावकों को खास सुरक्षा में रखा गया. अब प्लान है कि इन शावकों को टाइगर सफारी में छोड़ा जाएगा. इसके लिए उनकी शिकार की ट्रेनिंग अब जल्द ही शुरू कर दी जाएगी. ऐसे में कोशिश है कि इन शावकों को पूरी तरह जंगली माहौल में ही पालपोस कर बड़ा किया जाए ताकि ये टाइगर सफारी में पूरी तरह से जंगली बाघों की तरह ही बर्ताव करें.from Latest News राजस्थान News18 हिंदी https://ift.tt/2HSpxJb
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